तुम्हारा जवाब नहीं

 हाथों मे गुलाब नहीं आंखों में शराब नहीं

हम तो यूंही फ़िदा है तुम पर तुम्हारा जवाब नहीं।

इशारों में कह देते हो हर बात दिल की हमसे 

तुम्हारी बात क्या हैं तुम्हारा जवाब नहीं।


क्यों छुपाते हों दिल की बातों को हमसे ही तुम

मानो तुम कुछ भी मगर इतने भी खराब नहीं


रख के भूल जाओगे क्या हमको भी इसी तरह

तुम्हारी किताब में दबा हुआ मैं गुलाब नहीं


जो महक आती है सांसों में तुम्हारी  भीनी भीनी सी

मेरी याद है वो कोई फूल ए गुलाब नहीं


देख के भी नज़रें चुराते हो क्यों आखिर हमसे

हम तो उलझे सवाल है कोई सीधे जवाब नही


तुम्हारे सीने में जो दिल है दस्तखत है उस पर मेरा

यकीं  नहीं तो देख लो इरादा कुछ खराब नही


कभी बेसबब मेरे सीने पे तू सर को रख के देख तो

मैं जिंदा हूं मेरी जिंदगी  मैं कोई  ख़्वाब नही


डूब जायेगा चांद फिर टूट कर मेरे जहन में आज

रोक लो ये लम्हा यहीं ये इंतिहा है आगाज़ नहीं


लो फिर उलझ गए मदहोश उनकी जुल्फों के पेंचो में

उलझने कितनी है देखो इनका तो कुछ हिसाब नहीं




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