सादगी
तेरी सादगी ने इस कदर रुसवा किया मुझे
इतना बदल गया ये क्या हुआ तुझे
मेरे अल्फ़ाज़ जो खानाबदोश है मगर
एक दम ठहर गए जब से देखा तुझे
ना कोई हर्फ ना जुबां ना लफ्ज़ ही मिले
किस तरह आज कागज पे मै लिखूं तुझे
इतना मासूम सा एक बच्चा कहां खो गया
मुझको बताओ यार अब खोजू कहां तुझे
अब मिले हो शुक्रिया मगर इतना तो तय ही है
पहले जो मिलते तो कुछ और ही मैं कहता तुझे
क्यूं बेदम सा हो गया वो क्यूं तुम हुए जुदा
तुम तो बेरहम हो अब क्या कहूं तुझे
ये कसीदे ये फ़िराक़ ए जिन्दगी और एक हम
इस जिंदगी ने और क्या तोहफा दिया तुझे
इसके सिवा कुछ भी नहीं मदहोश याद हैं
देखा जो एक बार तो बहका दिया मुझे
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